एक तरफ़ा मोह्हबत के कुछ लफ्ज।। लेखक- काजल जी

हेलो फ्रेंड आज मैं आपको एक तरफ़ा मोह्हबत के कुछ लफ्ज आपको बता चाहत हु। जो किसी मेरे एक दोस्त ने लिखा है। जो की आपको बहुत प्रेरणा दायक हो सकता है। ऐसे हमरे बहुत से दोस्त है जो की एक तरफा मोह्हबत करते है और अपने दिल की बात लफ्ज से बया नहीं कर पाते है।


एक तरफा मोह्हबत से कुछ लफ्ज 

उनकी पहली शायरी 

जिंदगी में कभी उस इंसान को मत खोना,
जो गुस्सा करके खुद तुम्हरे पास आये ।।

अगर मेरे चले से तू खुश है ,
तो तुझे तेरी ख़ुशी मुबारक हो।।  

अब फर्क नहीं पड़ता कोई साथ हो या न हो ,
अब मैं अकेले चलना सिख लिया हूँ।।

माफ़ करना मुझे तुम्हरा प्यार नहीं चाहिए ,
मुझे मेरा हस्ता खेलता दिल वापस कर दो।।

नहीं आता हमें अपने दर्द का दिखावा करना ,
बस चुप अकेले रोते है और सो जाते है।।

दिल तोड़ने वाले का कुछ नहीं जाता है,
टूटने वाले का सब कुछ चला जाता है।। 

मोह्हबत जब रूह से की है तो इंसान दुबारा,
मोह्हबत करने के काबिल नहीं होता  है।। 

''एक बात बोलू ,, चुप रहना ही ठीक है ,
अब लोगो को लवजो का गलत मतबल निकलने लगते है। 

लेखक :- काजल जी 

उनकी दूसरी शायरी 

कितने अजीब होते है न ये मोह्हबत के रिवाज लोग आप 
से तुम तुम से जान और जान से अनजान बन जाते है।। 

किसी को क्या बताये कितने मजबूर है हम ,
जिसे चाहा सच्चे दिल से उसी से  दूर है हम।। 

अब न तेरे आने की ख़ुशी न तेरे जाने का गम, 
गुजर गया तो वक्त जब तेरे दीवाने थे हम।। 

दर्द आखो से निकला तो सबने बोल कायर है ये ,
जब लफ्जो से निकला तो सब बोले शायर है ये।। 

लेखक :- काजल जी 

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